[<p style="text-align: justify;"><strong>How To Identify Constipation In Newborn Babies:</strong> न्यूबॉर्न बेबी और छोटे बच्चों में कब्ज की समस्या होना कई माता-पिता के लिए चिंता का कारण बन जाता है. अक्सर यह समझ पाना मुश्किल होता है कि बच्चा सच में कब्ज से परेशान है या यह उसकी उम्र के हिसाब से सामान्य स्थिति है. इसलिए जरूरी है कि पहले इसके संकेतों और कारणों को सही तरीके से समझा जाए. शिशुओं और बच्चों में कब्ज का मतलब होता है कि उनका मल बहुत सख्त हो गया है या उन्हें मल त्याग करने में परेशानी हो रही है. कई बार बच्चे को जोर लगाने पर दर्द होता है या कोशिश के बावजूद मल नहीं निकल पाता. हालांकि हर बच्चे का बॉवेल पैटर्न अलग होता है, इसलिए रोज मल न होना हमेशा कब्ज की निशानी नहीं है.</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>कैसे पहचानें बच्चों को कब्ज है या नहीं?</strong></p>
<p style="text-align: justify;">हेल्थ को लेकर ऑनलाइन जानकारी देने वाली वेबसाइट MedlinePlus के मुताबिक, अगर बच्चा बहुत ज्यादा चिड़चिड़ा रहने लगे, बार-बार उल्टी जैसा महसूस करे, मल बहुत सख्त और सूखा हो, मल त्याग करते समय दर्द हो या पेट फूला हुआ लगे, तो यह कब्ज के संकेत हो सकते हैं. बड़े बच्चों में हफ्ते में तीन बार से कम मल जाना, अंडरवियर में मल के निशान दिखना या मल में खून आना भी चेतावनी के संकेत हैं.</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>कब बनता है कब्ज?</strong></p>
<p style="text-align: justify;"> MedlinePlus की रिपोर्ट में बताया गया है कि कब्ज तब होती है जब मल लंबे समय तक आंतों में रुका रहता है और वहां से ज्यादा पानी सोख लिया जाता है. इससे मल सख्त हो जाता है. शिशुओं में ठोस आहार की शुरुआत, ब्रेस्ट मिल्क से फॉर्मूला पर शिफ्ट होना, पर्याप्त तरल न मिलना या माहौल में बदलाव भी इसकी वजह बन सकता है. कई बार बच्चे जानबूझकर टॉयलेट जाने की इच्छा को रोकते हैं. इसकी वजह टॉयलेट ट्रेनिंग का डर, पहले दर्दनाक अनुभव या स्कूल और पब्लिक टॉयलेट इस्तेमाल न करना हो सकता है. कुछ मामलों में आंतों से जुड़ी बीमारियां या कुछ दवाएं भी कब्ज का कारण बनती हैं.</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>घर पर किन बातों का रखा जा सकता है ध्यान?</strong></p>
<p style="text-align: justify;">न्यूबॉर्न और छोटे बच्चों में कब्ज से बचाव के लिए घर पर कुछ बातों का ध्यान रखा जा सकता है. दो महीने से बड़े शिशुओं को डॉक्टर की सलाह से थोड़ा पानी या फलों का जूस दिया जा सकता है. चार महीने के बाद अगर बच्चा ठोस आहार लेने लगे, तो फाइबर से भरपूर बेबी फूड फायदेमंद होते हैं. बड़े बच्चों को पर्याप्त पानी पिलाना, फल-सब्जियां और साबुत अनाज देना मददगार होता है. अगर बच्चा कब्ज के कारण टॉयलेट ट्रेनिंग में परेशानी महसूस करे, तो कुछ समय के लिए उसे रोक देना बेहतर रहता है.</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>कब डॉक्टर से मिलना होता है जरूरी?</strong></p>
<p style="text-align: justify;">अगर दो महीने से कम उम्र के शिशु को कब्ज हो, तीन दिन तक मल न आए और साथ में उल्टी या ज्यादा चिड़चिड़ापन हो, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए. सही समय पर पहचान और देखभाल से न्यूबॉर्न में कब्ज की समस्या को आसानी से संभाला जा सकता है.</p>
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<p style="text-align: justify;"><strong>Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.</strong></p>
Source:
www.abplive.com
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