[<p style="text-align: justify;"><strong>How Alzheimer Impacts Relationships:</strong> करीब चार दशक की शादी के बाद अगर आपका जीवनसाथी अचानक आपसे फिर से पूछे "क्या तुम मुझसे शादी करोगी?" तो यह सिर्फ एक भावुक पल नहीं, बल्कि याददाश्त से जूझती बीमारी और अटूट प्रेम की गहरी कहानी बन जाती है. 78 वर्षीय लिंडा फेल्डमैन के साथ नवंबर 2025 में कुछ ऐसा ही हुआ. उनके पति माइकल ओ राइली (77) अल्जाइमर से पीड़ित हैं. कई दिनों में उन्हें यह तक याद नहीं रहता कि लिंडा उनकी पत्नी हैं, लेकिन एक बात कभी नहीं बदलती, उन्हें बस यह एहसास रहता है कि वह उनसे बेहद प्यार करते हैं.</p>
<p style="text-align: justify;">हाल ही में The Washington Post में छपी इस कहानी में लिंडा के शब्दों में उन्हें बस इतना पता होता है कि वह मुझसे प्यार करते हैं, यह कभी नहीं बदलता. आज के दौर में, जहां रिश्ते जल्दी टूट जाते हैं, यह कहानी दिखाती है कि सच्चा प्यार बीमारी जैसी कठिन चुनौतियों के सामने भी टिक सकता है.</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>यादों से पहले की जिंदगी</strong></p>
<p style="text-align: justify;">माइकल और लिंडा की मुलाकात 1979 में हुई थी. दोनों कानून के क्षेत्र में काम करते थे और दोस्ती धीरे-धीरे गहरे रिश्ते में बदल गई. अलग-अलग स्वभाव होने के बावजूद वे एक-दूसरे की दुनिया का हिस्सा बने यात्राएं, लंबी बातचीत और परिवार के साथ बिताया समय उनकी जिंदगी की पहचान बन गया. 1987 में उन्होंने सादगी से शादी की और सालों तक एक मजबूत परिवार की तरह साथ रहे.</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>जब बीमारी समझ में आने लगी</strong></p>
<p style="text-align: justify;">करीब सात साल पहले माइकल को अल्ज़ाइमर होने का पता चला. यह बीमारी सिर्फ यादें नहीं छीनती, बल्कि व्यक्ति की पहचान, आत्मनिर्भरता और सामाजिक जीवन को भी धीरे-धीरे सीमित कर देती है. माइकल, जो कभी घंटों बिना नोट्स के कोर्ट में दलीलें देते थे, अब शब्दों और रास्तों में उलझने लगे. लिंडा ने लंबे समय तक घर पर उनकी देखभाल की, यह मानसिक और भावनात्मक रूप से बेहद थकाने वाला अनुभव था.</p>
<p style="text-align: justify;">अल्ज़ाइमर के मरीजों में चिड़चिड़ापन, भ्रम और पहचान खोने की समस्या आम होती है, लेकिन माइकल के साथ एक राहत की बात यह रही कि उनका स्नेह कभी कम नहीं हुआ. वे अब भी लिंडा का हाथ थामते, उन्हें गले लगाते और "आई लव यू" कहते रहे.</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>देखभाल और इमोशनल स्वास्थ्य</strong></p>
<p style="text-align: justify;">ढाई साल पहले लिंडा को भारी मन से माइकल को मेमोरी केयर फैसिलिटी में शिफ्ट करना पड़ा. यह फैसला कई परिवारों के लिए बेहद मुश्किल होता है, लेकिन सही देखभाल न सिर्फ मरीज, बल्कि देखभाल करने वाले की मानसिक सेहत के लिए भी जरूरी होती है. लिंडा मानती हैं कि यहां उन्हें यह सुकून है कि माइकल सुरक्षित हैं.</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>एक बार फिर ‘हां'</strong></p>
<p style="text-align: justify;">नवंबर 2025 में माइकल ने लिंडा से फिर से शादी का प्रस्ताव रखा. बिल्कुल जैसे पहली बार. उनके लिए यह नई बात थी, लेकिन लिंडा के लिए यह यादों से परे एक इमोशनल पल था. जनवरी में छोटे से समारोह में उन्होंने दोबारा शादी की. यह सिर्फ एक कहानी ही नहीं, बल्कि इस बात पर भी जोर देता है कि अल्ज़ाइमर जैसी बीमारी में इमोशनल जुड़ाव कितना अहम होता है.</p>
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<p><strong>Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.</strong></p>
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Source:
www.abplive.com
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