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आजकल जैसे ही हम किसी दुकान पर जाते हैं, हमारी नजर सबसे पहले उन चीजों पर जाती है जिन पर शुगर-फ्री, लो-कैलोरी या गिल्ट-फ्री लिखा होता है. हमें लगता है कि अगर चीनी नहीं है तो वह चीज अपने आप ही सेहत के लिए अच्छी होगी. खासकर डायबिटीज के डर से या वजन कम रखने के लिए लोग नियमित चीनी की जगह शुगर-फ्री मिठाइयां, बिस्किट, च्युइंग गम, प्रोटीन बार और डाइट ड्रिंक्स लेने लगे हैं. लेकिन सवाल यह है कि क्या शुगर-फ्री वाकई में पूरी तरह सुरक्षित है या फिर हम अनजाने में अपने शरीर, खासकर लिवर, को नुकसान पहुंचा रहे हैं. तो आइए जानते हैं कि डायबिटीज से बचने के लिए आप बार-बार शुगर फ्री लेते हैं तो यह कैसे लिवर बर्बाद करता है.
डायबिटीज और शुगर-फ्री का बढ़ता चलन
आज की लाइफस्टाइल में डायबिटीज बहुत तेजी से फैल रही है. अमेरिका के CDC के 2024 के आंकड़ों के अनुसार, वहां करीब 3.84 करोड़ लोग डायबिटीज से पीड़ित हैं, और हैरानी की बात यह है कि लगभग 87 लाख लोगों को तो यह भी पता नहीं कि उन्हें डायबिटीज है. ऐसे में लोग सोचते हैं कि अगर वे चीनी छोड़कर शुगर-फ्री चीजें अपनाएंगे तो वे सुरक्षित रहेंगे, इसलिए रिफाइंड चीनी की जगह एस्पार्टेम, सुक्रालोज और शुगर अल्कोहल जैसे स्वीटनर यूज किए जा रहे हैं. इन्हीं में से एक सॉर्बिटोल है.
सॉर्बिटोल क्या है?
सॉर्बिटोल एक तरह का शुगर अल्कोहल है, जो कम कैलोरी वाले और शुगर-फ्री प्रोडक्ट में यूज होता है. यह आमतौर पर शुगर-फ्री च्युइंग गम, प्रोटीन बार, लो-कैलोरी स्नैक्स, कफ सिरप, कुछ दवाइयां और कुछ फल (जैसे सेब, नाशपाती) में पाया जाता है. अब तक सॉर्बिटोल को चीनी से बेहतर और सुरक्षित ऑप्शन माना जाता रहा है. लेकिन अब इस पर सवाल उठने लगे हैं.
यह लिवर कैसे बर्बाद करता है?
अमेरिका के वॉशिंगटन यूनिवर्सिटी (सेंट लुइस) के वैज्ञानिकों ने हाल ही में एक अहम अध्ययन किया है, जो Science Signaling नाम की प्रतिष्ठित पत्रिका में प्रकाशित हुआ है. इस शोध का नेतृत्व डॉ. गैरी पैटी ने किया. उनकी टीम पहले ही यह साबित कर चुकी है कि फ्रक्टोज (एक तरह की शक्कर) लिवर को नुकसान पहुंचा कर फैटी लिवर और यहां तक कि कैंसर कोशिकाओं को भी बढ़ावा दे सकता है. इस नए अध्ययन में वैज्ञानिकों ने पाया कि सॉर्बिटोल, फ्रक्टोज से बस एक कदम दूर है और शरीर में जाकर वहीं नुकसान कर सकता है जो फ्रक्टोज करता है.
सॉर्बिटोल शरीर में क्या करता है?
शोध के अनुसार जब हम खाना खाते हैं, तो हमारे शरीर में ग्लूकोज (शुगर) बढ़ती है. यह ग्लूकोज आंत में जाकर सॉर्बिटोल में बदल सकती है फिर सॉर्बिटोल आंत से होकर लिवर तक पहुंचता है लिवर में यह फ्रक्टोज के रूप में बदल जाता है और यहीं से समस्या शुरू होती है. फ्रक्टोज को फैटी लिवर डिजीज का एक बड़ा कारण माना जाता है, जो आज दुनिया भर में लगभग 30 प्रतिशत वयस्कों को प्रभावित कर रहा है.
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