Microplastics And Cardiovascular Disease: हार्ट अटैक के मामले पिछले कुछ सालों में तेजी से बढ़े हैं. अब माइक्रोप्लास्टिक को लेकर एक नई स्टडी ने चिंता बढ़ा दी है. रिसर्च के मुताबिक, ये बेहद छोटे प्लास्टिक कण शरीर की आर्टरीज में जमा होकर हार्ट की बीमारी का खतरा बढ़ा सकते हैं, खासतौर पर पुरुषों में. माइक्रोप्लास्टिक ऐसे प्लास्टिक कण होते हैं जिनका आकार एक मिलीमीटर के हजार वें हिस्से से लेकर पांच मिलीमीटर तक हो सकता है. आज ये कण हर जगह मौजूद हैं, जैसे कि खाने-पीने की चीजों, पानी और यहां तक हवा में भी. साइंटिस्ट पहले ही बता चुके हैं कि ये कण ब्लड में प्रवेश कर सकते हैं और शरीर के अहम अंगों में जमा हो सकते हैं.
क्या निकला नई रिसर्च में?
अब तक की रिसर्च में माइक्रोप्लास्टिक को हार्मोनल गड़बड़ी, प्रजनन क्षमता पर असर, न्यूरोलॉजिकल नुकसान, कैंसर और दिल से जुड़ी बीमारियों से जोड़ा गया है. हालांकि हार्ट की बीमारी को लेकर स्थिति साफ नहीं थी कि माइक्रोप्लास्टिक सीधे आर्टरीज को नुकसान पहुंचाते हैं या सिर्फ बीमारी के साथ पाए जाते हैं. कैलिफोर्निया यूनिवर्सिटी, रिवरसाइड के बायोमेडिकल साइंसेज प्रोफेसर और इस स्टडी के राइटर चांगचेंग झोउ के अनुसार, यह स्टडी अब तक के सबसे मजबूत सबूतों में से एक है, जो दिखाता है कि माइक्रोप्लास्टिक सिर्फ हार्ट की बीमारी से जुड़े नहीं हैं, बल्कि उसे सीधे बढ़ा भी सकते हैं. उन्होंने यह भी बताया कि स्टडी में पुरुषों और महिलाओं के बीच असर का फर्क चौंकाने वाला रहा, जिससे भविष्य में यह समझने में मदद मिल सकती है कि दोनों के शरीर में सुरक्षा से जुड़े तंत्र कैसे अलग काम करते हैं.
किस पर की गई स्टडी?
इस रिसर्च में वैज्ञानिकों ने ऐसे चूहों पर स्टडी किया, जिनमें जनैटिक रूप से एथेरोस्क्लेरोसिस यानी आर्टरीज में प्लाक जमने का खतरा था. नर और मादा दोनों चूहों को कम फैट और कम कोलेस्ट्रॉल वाला खाना दिया गया, जो एक स्वस्थ और फिट इंसान की डाइट जैसा था. हालांकि, नौ हफ्तों तक इन चूहों को उनके वजन के हिसाब से माइक्रोप्लास्टिक की मात्रा दी गई, जो इंसानों को दूषित भोजन और पानी से मिलने वाली मात्रा के करीब मानी जाती है. इस दौरान चूहों का वजन नहीं बढ़ा और न ही कोलेस्ट्रॉल लेवल में इजाफा हुआ, फिर भी उनकी आर्टरीज को नुकसान पहुंचा.
मर्दों पर इसका कितना असर?
स्टडी में सबसे बड़ा फर्क नर और मादा चूहों में दिखा. माइक्रोप्लास्टिक के संपर्क में आने वाले नर चूहों में दिल से जुड़ी मुख्य आर्टरी में प्लाक 63 फीसदी तक बढ़ गया, जबकि छाती की ऊपरी हिस्से में जाने वाली एक अन्य आर्टरी में यह बढ़ोतरी सात गुना से ज्यादा पाई गई. वहीं, मादा चूहों में ऐसी कोई बड़ी बढ़ोतरी नहीं देखी गई. आगे की जांच में पता चला कि माइक्रोप्लास्टिक ने आर्टरीज की सेल्स के व्यवहार और संतुलन को बिगाड़ दिया. खासतौर पर एंडोथीलियल सेल्स ने, जो ब्लड वेसल्स की अंदरूनी परत बनाती हैं, सबसे ज्यादा प्रभावित हुईं. अब वैज्ञानिक यह जानने में जुटे हैं कि माइक्रोप्लास्टिक का असर नर चूहों में ज्यादा क्यों दिखा और क्या ऐसा ही फर्क इंसानों में भी देखने को मिलता है.
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Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.
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