[<p style="text-align: justify;"><strong>Physical Activity And Cancer Prevention:</strong> रोजाना सिर्फ 10 मिनट की तेज और एनर्जेटिक एक्सरसाइज न सिर्फ आपकी फिटनेस बढ़ा सकती है, बल्कि आंतों के कैंसर यानी बॉवेल कैंसर से लड़ने में भी मदद कर सकती हैय यह दावा न्यूकैसल यूनिवर्सिटी के रिसर्चर के एक अध्ययन में किया गया है. चलिए आपको बताते हैं कि रिसर्च में क्या निकला और एक्सरसाइज कौन सा और कैसे करना है. </p>
<p style="text-align: justify;"><strong>क्या निकला रिसर्च में?</strong></p>
<p style="text-align: justify;">रिसर्च में सामने आया कि कम समय की लेकिन तेज एक्सरसाइज शरीर के भीतर खून में ऐसे ऑर्गेनिक बदलाव पैदा करती है, जो कैंसर सेल्स की बढ़त को रोकने और डीएनए को होने वाले नुकसान की मरम्मत को तेज करने में मदद करते हैं. रिसर्चर के मुताबिक, एक्सरसाइज के दौरान खून में कुछ खास छोटे मॉलिक्यूल्स की मात्रा बढ़ जाती है, जिनका संबंध सूजन कम करने, ब्लड वेसल्स की काम करने की क्षमता सुधारने और मेटाबॉलिज्म बेहतर करने से है. जब इन एक्सरसाइज-से पैदा हुए मॉलिक्यूल्स को लैब में बॉवेल कैंसर की कोशिकाओं पर इस्तेमाल किया गया, तो 1,300 से ज्यादा जीन की गतिविधियों में बदलाव देखा गया. इनमें वे जीन भी शामिल थे जो डीएनए रिपेयर, एनर्जी प्रोडक्शन और कैंसर सेल्स की ग्रोथ को नियंत्रित करते हैं. </p>
<p style="text-align: justify;"><strong>कहां पब्लिश हुई रिसर्च? </strong></p>
<p style="text-align: justify;">यह स्टडी इंटरनेशनल जर्नल ऑफ कैंसर में प्रकाशित हुआ है. शोध के मुताबिक, एक्सरसाइज शरीर में ऐसे सिग्नल भेजती है जो जीन के स्तर पर ट्यूमर की ग्रोथ और जीनोम की अस्थिरता को प्रभावित करते हैं. स्टडी का नेतृत्व करने वाले डॉक्टर सैम ऑरेंज ने कहा कि यह बात खास है कि एक्सरसाइज सिर्फ हेल्दी टिशूज़ के लिए ही फायदेमंद नहीं होती, बल्कि यह ब्लडस्ट्रीम के ज़रिए ऐसे शक्तिशाली संकेत भेजती है, जो कैंसर सेल्स के हजारों जीन को प्रभावित कर सकते हैं. उन्होंने यह भी बताया कि यह रिसर्च भविष्य में ऐसे इलाज के रास्ते खोल सकती है, जो एक्सरसाइज के जैविक प्रभावों की नकल कर सकें या उन्हें और मजबूत बना सकें. इससे कैंसर के इलाज और मरीजों के नतीजों में सुधार संभव हो सकता है.</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>एक्सरसाइज न करने के नुकसान</strong></p>
<p style="text-align: justify;">स्टडी में यह भी पाया गया कि एक्सरसाइज से उन जीन की सक्रियता बढ़ती है जो माइटोकॉन्ड्रियल एनर्जी मेटाबॉलिज्म को सपोर्ट करते हैं, जिससे सेल्स ऑक्सीजन का बेहतर इस्तेमाल कर पाती हैं. वहीं, तेजी से सेल्स की बढ़त से जुड़े जीन की गतिविधि कम हो जाती है, जिससे कैंसर सेल्स का अटैक घट सकता है. इसके साथ ही, एक्सरसाइज के बाद लिया गया खून डीएनए रिपेयर को बढ़ावा देता है और पीएनकेपी नाम के एक अहम जीन को सक्रिय करता है.</p>
<p style="text-align: justify;">इस शोध में 50 से 78 साल की उम्र के 30 लोगों को शामिल किया गया था. सभी प्रतिभागी पुरुष और महिलाएं थे, जो ओवरवेट या मोटापे का शिकार थे, लेकिन अन्य गंभीर बीमारियों से मुक्त थे. उन्होंने लगभग 10 मिनट की हाई-इंटेंसिटी साइक्लिंग की, जिसके बाद उनके ब्लड सैंपल लेकर 249 प्रोटीन का विश्लेषण किया गया. इनमें से 13 प्रोटीन एक्सरसाइज के बाद बढ़े पाए गए, जिनमें इंटरल्यूकिन-6 भी शामिल था, जो डीएनए रिपेयर में मदद करता है.</p>
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<p style="text-align: justify;"><strong>Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.</strong></p>
Source:
www.abplive.com
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