[<p style="text-align: justify;"><strong>Do Regular Periods Mean Hormones Are Balanced:</strong> अक्सर महिलाएं यह मान लेती हैं कि अगर उनके पीरियड्स हर महीने समय पर आ रहे हैं, तो उनके हार्मोन बिल्कुल ठीक होंगे. 28 से 30 दिन के अंतर पर नियमित ब्लीडिंग होना उन्हें राहत देता है और यही मान लिया जाता है कि शरीर के अंदर सब कुछ संतुलित है. लेकिन सच्चाई यह है कि नियमित पीरियड्स सिर्फ एक बाहरी संकेत हैं, पूरी तस्वीर नहीं. चलिए आपको बताते हैं कि इसको लेकर एक्सपर्ट क्या कहते हैं. </p>
<p style="text-align: justify;">हार्मोनल सिस्टम बेहद जटिल होता है. इसमें ब्रेन ओवरी, थायरॉइड, एड्रिनल ग्लैंड्स और मेटाबॉलिज्म, सभी एक-दूसरे से जुड़े होते हैं. कई बार यह सिस्टम अंदरूनी तनाव और असंतुलन के बावजूद पीरियड्स को नियमित बनाए रखता है. यही वजह है कि कुछ महिलाओं के पीरियड्स तो समय पर आते हैं, लेकिन उन्हें फर्टिलिटी से जुड़ी दिक्कतें, तेज दर्द, मूड स्विंग्स या प्रीमेंस्ट्रुअल समस्याएं झेलनी पड़ती हैं.</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>क्या कहते हैं एक्सपर्ट?</strong></p>
<p style="text-align: justify;">लूमा फर्टिलिटी की मेडिकल डायरेक्टर डॉ. राधिका शेठ ने TOI को बताया कि मेडिकल प्रैक्टिस में यह आम बात है कि नियमित पीरियड्स वाली महिलाओं में भी लंबे समय से हार्मोनल असंतुलन मौजूद रहता है. उनका कहना है कि पीरियड्स केवल एक नतीजा हैं, जबकि इसके पीछे चल रही हार्मोनल प्रक्रिया कहीं ज्यादा गहरी और संवेदनशील होती है. एक आम लेकिन नजरअंदाज की जाने वाली समस्या है प्रोजेस्टेरोन की कमी, जिसे ल्यूटियल फेज इंसफिशिएंसी कहा जाता है. ऐसी स्थिति में महिला समय पर ओवुलेट तो करती है और पीरियड्स भी नियमित रहते हैं, लेकिन प्रोजेस्टेरोन पर्याप्त न होने की वजह से प्रेग्नेंसी टिक नहीं पाती. अगर सही समय पर टेस्ट न किया जाए, तो यह समस्या सालों तक पकड़ में नहीं आती.</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>रेगुलर पीरियड्स में भी दिक्कत</strong></p>
<p style="text-align: justify;">इसी तरह PCOS को अक्सर अनियमित पीरियड्स से जोड़ा जाता है, लेकिन इसके हल्के या मेटाबॉलिक रूप में कई महिलाओं के पीरियड्स नियमित होते हैं. फिर भी उनमें इंसुलिन रेसिस्टेंस या हल्का हार्मोनल असंतुलन मौजूद हो सकता है, जो एग क्वालिटी और फर्टिलिटी को प्रभावित करता है. थायरॉइड या प्रोलैक्टिन में हल्की गड़बड़ी भी पीरियड्स को प्रभावित किए बिना ओवुलेशन और हार्मोन सपोर्ट को कमजोर कर सकती है. इसके अलावा लगातार तनाव, नींद की कमी और अनियमित खानपान शरीर में कोर्टिसोल बढ़ा देता है, जिससे हार्मोनल बैलेंस धीरे-धीरे बिगड़ता है.</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>किन चीजों को नहीं करना चाहिए नजरअंदाज?</strong></p>
<p style="text-align: justify;">डॉक्टरों का कहना है कि तेज मूड स्विंग्स, दर्दनाक पीरियड्स, लगातार थकान, सूजन, लो लिबिडो या इमोशनल अस्थिरता जैसे लक्षणों को सामान्य मानकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए. ये संकेत बताते हैं कि भले ही पीरियड्स नियमित हों, लेकिन शरीर अंदर से संतुलन बनाने की कोशिश कर रहा है.</p>
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<p><strong>Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.</strong></p>
Source:
www.abplive.com
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