Hair Straightening: आजकल लड़कियां और महिलाएं अपने बालों को सीधा, मुलायम और चमकदार बनाने के लिए हेयर स्ट्रेटनिंग जैसे ट्रीटमेंट का सहारा लेती हैं. सैलून में किए जाने वाले ये ट्रीटमेंट तुरंत अच्छे नतीजे तो देते हैं, लेकिन इनमें इस्तेमाल होने वाले केमिकल लंबे समय में गंभीर बीमारियों का कारण बन सकते हैं. खूबसूरत दिखने की जल्दबाजी में अक्सर इनके दुष्प्रभावों को नजरअंदाज कर दिया जाता है.
इजरायल की चौंकाने वाली घटना
हाल ही में इजरायल से एक गंभीर मामला सामने आया है, जहां 17 साल की एक लड़की को हेयर स्ट्रेटनिंग कराने के बाद अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा. रिपोर्ट के अनुसार, इस ट्रीटमेंट के बाद उसकी किडनी को गंभीर नुकसान पहुंचा. लड़की को गंभीर किडनी फेलियर की हालत में शारे ज़ेडेक मेडिकल सेंटर में भर्ती किया गया.
यह कोई पहला मामला नहीं है. इससे पहले पिछले महीने 25 साल की एक महिला को भी हेयर स्ट्रेटनिंग के बाद किडनी डैमेज होने पर अस्पताल में भर्ती कराया गया था. लगातार ऐसे मामलों के सामने आने से यह सवाल उठने लगा है कि क्या हेयर स्ट्रेटनिंग वाकई सुरक्षित है.
कौन-कौन से लक्षण दिखे
अस्पताल की रिपोर्ट के मुताबिक, हेयर स्ट्रेटनिंग ट्रीटमेंट के कुछ ही समय बाद लड़की को लगातार उल्टियां, मतली और तेज सिरदर्द की शिकायत होने लगी. हालत बिगड़ने पर उसे तुरंत अस्पताल ले जाया गया, जहां जांच में पता चला कि उसकी किडनी गंभीर रूप से प्रभावित हो चुकी है.
हेयर स्ट्रेटनिंग और किडनी डैमेज का संबंध
नेफ्रोलॉजी इंस्टीट्यूट की प्रमुख प्रोफेसर लिंडा शावित और डॉ. एलोन बेनाया द्वारा 2023 में किए गए एक अध्ययन में इस खतरे की पुष्टि हुई है. इस शोध में 14 से 58 साल की उम्र की 26 महिलाओं के मामलों का अध्ययन किया गया, जिन्हें पहले कोई गंभीर बीमारी नहीं थी, लेकिन वे अचानक गंभीर किडनी फेलियर के साथ अस्पताल पहुंचीं.
शोधकर्ताओं ने पाया कि इन सभी महिलाओं ने ग्लाइऑक्सिलिक एसिड आधारित हेयर स्ट्रेटनिंग ट्रीटमेंट कराया था. माना जा रहा है कि यह केमिकल शरीर में जाकर किडनी पर बुरा असर डाल सकता है.
कैसे करें बचाव
हालांकि कई देशों में ग्लाइऑक्सिलिक एसिड वाले हेयर प्रोडक्ट्स पर प्रतिबंध लगाया जा चुका है, लेकिन फिर भी सतर्क रहना बेहद जरूरी है. किसी भी केमिकल प्रोडक्ट को इस्तेमाल करने से पहले उसके दुष्प्रभावों की पूरी जानकारी लें.
हेयर स्ट्रेटनिंग के दौरान केमिकल को सीधे खोपड़ी या बालों की जड़ों पर लगाने से बचें. कम से कम 1.5 सेंटीमीटर की दूरी बनाए रखें. इसके अलावा, हेयरड्रेसर और क्लाइंट दोनों को यह ध्यान रखना चाहिए कि उत्पाद को ज्यादा गर्म न किया जाए और दिए गए निर्देशों का सही तरीके से पालन हो.
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