ज्यादातर लोग पॉटी करते समय होने वाली समस्याओं के बारे में बात नहीं करना चाहते. उन्हें लोगों से इन दिक्कतों को शेयर करने में शर्म आती है, जबकि ऐसा बिल्कुल नहीं होना चाहिए. समय रहते डॉक्टर से इन दिक्कतों के बारे में बात करने से आप कोलोरेक्टल कैंसर को आसानी से मात दे सकते हैं. इसे कोलोन और रेक्टल कैंसर के नाम से भी जाना जाता है.
डॉक्टरों का कहना है कि यह बीमारी ज्यादातर बड़ी उम्र के लोगों को होती थी, लेकिन आज के समय में युवाओं में भी इनके केस काफी ज्यादा बढ़ते नजर आ रहे हैं. आश्चर्यजनक बात यह है कि उनमें यह केस पहले और दूसरे स्टेज पर नहीं बल्कि लास्ट स्टेज के केस में आ रहे हैं.
क्यों इसके लक्षणों का लोगों को नहीं पता लगता?
इस कैंसर के देरी से पता चलने का मुख्य कारण दर्द का अहसास न होना है. दरअसल, लोग उन्हीं बीमारी को गंभीर से लेते है, जो उन्हें शरीर में ज्यादा दर्द देती है. कोलोरेक्टल कैंसर में ज्यादातर लोगों को दर्द का अहसास नहीं होता है बल्कि मल त्याग करने की आदतों में बदलाव आ जाता है, जिसे ज्यादातर पेट खराब और पाइल्स जैसी समस्या समझ कर नजरअंदाज कर दिया जाता है. कई स्टडी के अनुसार, पॉटी में होने वाला बदलाव कोलोरेक्टल कैंसर के शुरूआती स्टेज का लक्षण हो सकता है.
मल का आकार अलग होना
अगर आपको बार-बार पॉटी करते समय पैंसिल जैसा या बिल्कुल पतला स्टूल आता है तो इसे इग्नोर न करें. डॉक्टरों का कहना है कि जब ट्यूमर हमारे रेक्टम या कोलोन में ग्रो कर जाता है तो वह पॉटी को पास होने में बाधा डालता है, जिसके कारण उसमें बदलाव देखने को मिलता है.
मल में म्यूकस का ज्यादा आना
जब हमारे कोलोन की बाहरी सतह ट्यूमर की वजह से सूज जाती है तो पॉटी करते समय जैली जैसी बनावट या चिपचिपा म्यूक्स आता है. इसलिए इसको इग्नोर न करें और जल्द ही डाक्टर को दिखाएं
मल में खून आना
मल में खून आने से कैंसर का आसानी से पता लगा लिया जाता है. दरअसल, लोग बाकी के लक्षण को पहचान पाए या नहीं लेकिन इस लक्षण के दिखने पर तुरंत डॉक्टर के पास जाते हैं.
पेट खराब होना या कब्ज होना
अगर आपका पेट बार-बार खराब रहता है या आपको हमेशा कब्ज जैसी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है. तो इसे इग्नोर न करें. इस कैंसर के कारण पेट में इस तरह की दिक्कत आना काफी सामान्य है.
जल्दी पहचान लें लक्षण-
अगर आप इनके लक्षणों को बार-बार इग्नोर करते हैं तो यह आपके पूरे शरीर में फैल जाएगा. शुरूआत में इसके लक्षणों के पता लगने पर आप आसानी से इसका इलाज करवा सकते हैं. लास्ट के स्टेज में आपके शरीर को दम तोड़ देने वाले प्रोसेस से जाना पड़ सकता है. इसके अलावा बीमारी से लड़ पाने की उम्मीद भी बहुत कम हो जाती है.
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