PAM Disease: हाल के दिनों में केरल और अब पश्चिम बंगाल में एक बेहद खतरनाक बीमारी ने चिंता बढ़ा दी है. यह बीमारी प्राइमरी अमीबिक मेनिंगोएन्सेफलाइटिस (PAM) के नाम से जानी जाती है, जिसे आम भाषा में ‘ब्रेन ईटिंग अमीबा’ कहा जाता है. इसका कारण एक परजीवी है जिसका नाम नेगलेरिया फाउलेरी (Naegleria fowleri) है. यह सीधे मानव दिमाग पर हमला करता है और इलाज शुरू करने के बाद भी बचने की संभावना बेहद कम रहती है.
कैसे फैली बीमारी?
डॉक्टरों के अनुसार यह परजीवी अक्सर गर्म पानी वाले तालाबों, नदियों और झीलों में पाया जाता है. जब कोई व्यक्ति नहाते या तैरते समय पानी नाक के जरिए अंदर खींच लेता है, तब यह अमीबा दिमाग तक पहुंचकर संक्रमण फैलाता है. यह बीमारी एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में नहीं फैलती, बल्कि केवल पानी के जरिए फैलती है.
तेजी से बढ़ते मामले
संसद में शुक्रवार को दिए गए आंकड़ों के अनुसार स्थिति बेहद चिंताजनक है. केंद्रीय स्वास्थ्य राज्य मंत्री प्रतापराव जाधव ने लोकसभा को बताया कि 2025 में केवल केरल में 170 लोग इस बीमारी से प्रभावित हुए. इनमें से 42 लोगों की मौत हो चुकी है.
यह आंकड़ा चौंकाने वाला है क्योंकि सितंबर तक दुनिया भर में कुल 500 मामले थे, लेकिन केवल डेढ़ साल में केरल में ही 100 से ज्यादा केस सामने आ चुके हैं. मंत्री के अनुसार 2023 में 2 केस, 2 मौतें, 2024 में 39 केस, 9 मौतें और 2025 में 170 केस, 42 मौतें साफ है कि इस साल यह बीमारी तेजी से फैली है.
सरकार की कार्रवाई
- स्वास्थ्य मंत्रालय ने स्थिति को गंभीर मानते हुए कई कदम उठाए हैं.
- कोझीकोड के NCDC ने इस बीमारी पर विस्तृत अध्ययन किया है.
- ICMR और ICAR इसकी जांच और निगरानी कर रहे हैं.
- देशभर में 18 VRDL लैब इस बीमारी की टेस्टिंग और निगरानी कर रही हैं.
- राज्य सरकारों को चेतावनी जारी कर लोगों को जागरूक रहने के लिए कहा गया है.
नेगलेरिया फाउलेरी संक्रमण के शुरुआती लक्षण सामान्य बुखार या सर्दी-खांसी जैसे लगते हैं, इसलिए लोग इसे अक्सर नजरअंदाज कर देते हैं. लेकिन यह गलती भारी पड़ सकती है क्या आप इसे एक सामान्य बीमारी मानकर खारिज कर रहे हैं? सावधान रहें! क्या आपके शरीर में विनाशकारी ‘ब्रेन-ईटिंग अमीबा’ ने घर बना लिया है? इसलिए, इन लक्षणों को देखते ही सावधान रहें.











